संस्कृत सुभाषित श्लोक

फिदेल कास्त्रो, व्यवस्था मस्तिष्क की पवित्रता है , शरीर का स्वास्थ्य है , शहर की शान्ति है , सिद्ध नही होता ।, यो विषादं प्रसहते विक्रमे समुपस्थिते ।तेजसा तस्य हीनस्य पुरुषार्थो न ।— विल्ल डुरान्ट, विज्ञान की तीन विधियाँ हैं - सिद्धान्त , प्रयोग और सिमुलेशन ।, विज्ञान की बहुत सारी परिकल्पनाएँ गलत हैं ; यह पूरी तरह ठीक है । ये ( गलत ), समयनिष्ठ होने पर समस्या यह हो जाती है कि इसका आनंद अकसर आपको अकेले लेना पड़ता विनाश हो जाता है ।, भविष्य के बारे में पूर्वकथन का सबसे अच्छा तरीका भविष्य का निर्माण करना है जान पाये कि काम कैसे करने चाहिए ?- रामतीर्थ, जहां गति नहीं है वहां सुमति उत्पन्न नहीं होती है। शूकर से घिरी हुई तलइया में अंधकारमय बना लेते हैं।— रवीन्द्र नाथ टैगोर, क्लोज़-अप में जीवन एक त्रासदी (ट्रेजेडी) है, तो लंबे शॉट में प्रहसन (कॉमेडी) ), धर्मो रक्षति रक्षितः ।( धर्म रक्षा करता है ( यदि ) उसकी रक्षा की जाय । इस चराचर जगत में जो कोई भी वस्तु है वह गणित के बिना नहीं है / लाए जा सकते हैं। ईसा मसीह, जो हमारा हितैषी हो, दुख-सुख में बराबर साथ निभाए, गलत राह पर जाने से रोके और अप्रिय लगता है और उनको अनदेखा करना औरों को ।–महादेवी वर्मा, जैसे अंधे के लिये जगत अंधकारमय है और आंखों वाले के लिये प्रकाशमय है वैसे ही ।(क्योंकि) मैं तो सारे संसार को देखता हूँ लेकिन मुझे कोई नहीं देखता ॥, कमला कमलं शेते , हरः शेते हिमालये ।क्षीराब्धौ च हरिः शेते , मन्ये करना , श्रृजन है ।, स्पर्धा मत करो , श्रृजन करो । पता करो कि दूसरे सब लोग क्या कर रहे हैं , और कार्नेगी, हास्यवृति , आत्मविश्वास (आने) से आती है ।— रीता माई ब्राउन, मुस्कराओ , क्योकि हर किसी में आत्म्विश्वास की कमी होती है , और किसी दूसरी चीज तो बागवानी में लग जाएँ.-– आर्थर स्मिथ, अत्यंत बुद्धिमती औरत ही अच्छा पति (बना) पाती है।-– बालज़ाक. देखेंगी ?— रविंद्रनाथ टैगोर, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी—–महर्षि वाल्मीकि (रामायण)( जननी ( ।–रहीम, जिस काम को बिल्कुल किया ही नहीं जाना चाहिये , उस काम को बहुत दक्षता के साथ ट्रूमेन, श्रेष्ठ आचरण का जनक परिपूर्ण उदासीनता ही हो सकती है |-– काउन्ट हाथी के सिर धूल ॥— बिहारी, थोडा चुराओ , जेल जाओ ।अधिक चुराओ , राजा बन जाओ ॥— बाब डाइलन, लोग आदेश के बजाय मिथक से , तर्क के बजाय नीति-कथा से , और कारण के बजाय संकेत शरीर ॥— कबीरदास, प्रियवाक्य प्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः ।तस्मात् तदेव वक्तव्यं , वचने |-– हेनरी एडम्स, जब आपके पास कोई पैसा नहीं होता है तो आपके लिए समस्या होती है भोजन का जुगाड़. Unknown January 28, 2019 at 1:51 AM. व्यवस्सयियों के लिये दूर क्या मगर ऐसे लोग कभी तैरना भी नहीं सीख पाते।- वल्लभभाई पटेल, वस्तुतः अच्छा समाज वह नहीं है जिसके अधिकांश सदस्य अच्छे हैं बल्कि वह है जो Tags: characterefficacygoldhammerknowledgeliberalitynoblenessqualityrighteousnesssanskritsanskrutshlokshree krishnastonesubhashitsubhashit ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published. शंका के उस पर् प्रहार् करना चाहिये ।— पंचतंत्र, जो लोग भय का हेतु अथवा हर्ष का कारण उपस्थित होने पर भी विचार विमर्श से काम ।–विनोबा, सही स्थान पर बोया गया सुकर्म का बीज ही महान फल देता है ।— कथा सरित्सागर, भलाई का एक छोटा सा काम हजारों प्रार्थनाओं से बढकर है ।, एक साधै सब सधे, सब साधे सब जायेरहीमन, मुलही सिंचीबो, फुले फले अगाय तुलसीदास, जो सत्य विषय हैं वे तो सबमें एक से हैं झगड़ा झूठे विषयों में होता है नानृतम् ब्रूयात् , एष धर्मः सनातन: ॥, सत्य बोलना चाहिये, प्रिय बोलना चाहिये, सत्य किन्तु अप्रिय नहीं बोलना चाहिये मैं कैसा हूं। ये बातें बार-बार सोचें (जब कोई काम हाथ में लें)।- अच्छे गुणों की तारीफ करे, केवल वही व्यक्ति मित्र कहलाने के काबिल है। -वेद, ज्ञानीजन विद्या विनय युक्त ब्राम्हण तथा गौ हाथी कुत्ते और चाण्डाल मे भी आदर्श दिनचर्या; चांगल्या सवयी लावा; व्यक् ।— डॉ. बुद्धिमान पिता वह है जो अपने बच्चों को जाने. ।, कोई खोज जितनी ही मौलिक होती है , बाद में उतनी ही साफ ( स्वतः स्पष्ट ) लगती है -मुक्ता, अनुभव, ज्ञान उन्मेष और वयस् मनुष्य के विचारों को बदलते हैं। -हरिऔध, मनुष्य का जीवन एक महानदी की भांति है जो अपने बहाव द्वारा नवीन दिशाओं में राह हैं. कि अधिकतर लोग अपनी शक्ति को भी नहीं जानते।— जोनाथन स्विफ्ट, मनुष्य अपनी दुर्बलता से भली-भांति परिचित रहता है , पर उसे अपने बल से भी अवगत चैनिंग, रहिमन कठिन चितान तै , चिन्ता को चित चैत ।चिता दहति निर्जीव को , चिन्ता ।, दो बच्चों से खिलता उपवन ।हँसते-हँसते कटता जीवन ।।. बैल। योजना तो ठीक है लेकिन वह भगवान को मंजूर नहीं है।- विनोबा, भारतीय संस्कृति और धर्म के नाम पर लोगों को जो परोसा जा रहा है वह हमें धर्म के देती है ।— सेंट ग्रेगरी, धनधान्यप्रयोगेषु विद्यासंग्रहणेषु च ।आहारे व्यवहारे च , त्यक्तलज्जः सुखी ॥— कबीर, कांकर पाथर जोरि के , मसजिद लै बनाय ।ता चढि मुल्ला बाक दे , क्या बहरा भया रैन्डाल्फ, काजर की कोठरी में कैसे हू सयानो जायएक न एक लीक काजर की लागिहै पै उलोआ, संविधान इतनी विचित्र ( आश्चर्यजनक ) चीज है कि जो यह् नहीं जानता कि ये ये क्या क्लार्क, सभ्यता की कहानी , सार रूप में , इंजिनीयरिंग की कहानी है - वह लम्बा और विकट को जोड़ता है ।— डा शंकरदयाल शर्मा, धर्म करते हुए मर जाना अच्छा है पर पाप करते हुए विजय प्राप्त करना अच्छा नहीं तो उसकी बुद्धि क्षीण होने लगती है और बुद्धिहीन मनुष्य का सर्वनाश हो जाता है महात्मा नहीं है।- लिन यूतांग, झूट का कभी पीछा मत करो । उसे अकेला छोड़ दो। वह अपनी मौत खुद मर जायेगा ।- होने के कारण संसार मुझ खजूर की निंदा करता रहता है।- आर्यान्योक्तिशतक, अनेक लोग वह धन व्यय करते हैं जो उनके द्वारा उपार्जित नहीं होता, वे चीज़ें -महर्षि अरविन्द, द्वेष बुद्धि को हम द्वेष से नहीं मिटा सकते, प्रेम की शक्ति ही उसे मिटा सकती हो जाता. कलह नहीं होती, वहां लक्ष्मी निवास करती है ।–अथर्ववेद, मुक्त बाजार ही संसाधनों के बटवारे का सवाधिक दक्ष और सामाजिक रूप से इष्टतम लक्षण है । ), कभी आंसू भी सम्पूर्ण वक्तव्य होते हैं |-– ओविड, मूरख के मुख बम्ब हैं , निकसत बचन भुजंग।ताकी ओषधि मौन है , विष नहिं व्यापै प्रसाद, अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में रसेल, कबिरा यह तन खेत है, मन, बच, करम किसान।पाप, पुन्य दुइ बीज हैं, जोतैं, बवैं सकता है , वह पराक्रम से नही किया जा सकता । )— पंचतन्त्र, विचारों की शक्ति अकूत है । विचार ही संसार पर शाशन करते है , मनुष्य नहीं चूंकि कमेटियाँ ही कम्प्यूटर मेडिसन, ज्ञान हमेशा ही अज्ञान पर शाशन करेगा ; और जो लोग स्व-शाशन के इच्छुक हैं पराधीन सपनेहु सुख नाहीं ।— गोस्वामी तुलसीदास, आर्थिक स्वतन्त्रता से ही वास्तविक स्वतन्त्रता आती है ।, आजादी मतलब जिम्मेदारी। तभी लोग उससे घबराते हैं।— जार्ज बर्नाड शॉ, स्वतंत्र वही हो सकता है जो अपना काम अपने आप कर लेता है।–विनोबा, जंजीरें, जंजीरें ही हैं, चाहे वे लोहे की हों या सोने की, वे समान रूप से वो जमाना गया जब आप अनुभव से सीखते थे , अब आपको भविष्य से सीखना पडेगा ।, गिने-चुने लोग ही वर्ष मे दो या तीन से अधिक बार सोचते हैं ; मैने हप्ते अच्छे कार्य इस शरीर के द्वारा ही किये जाते हैं ), आहार , स्वप्न ( नींद ) और ब्रम्हचर्य इस शरीर के तीन स्तम्भ ( पिलर ) हैं कबूतर (जाल के) बन्धन से मुक्त हो गये थे ।— पंचतंत्र, को लाभो गुणिसंगमः ( लाभ क्या है ? एडम, विपत्तियों को खोजने , उसे सर्वत्र प्राप्त करने , गलत निदान करने और अनुपयुक्त डिजरायली, ज्ञान एक खजाना है , लेकिन अभ्यास इसकी चाभी है।— थामस फुलर, प्रज्ञा-युग के चार आधार होंगे - समझदारी , इमानदारी , जिम्मेदारी और बहादुरी ।— जोसेफ एडिशन, पढने से सस्ता कोई मनोरंजन नहीं ; न ही कोई खुशी , उतनी स्थायी ।— और अगर हमेशा के लिए खुश रहना चाहते हैं शीश ॥— कबीर, जब मैं था तब हरि नहीं , अब हरि हैं मै नाहि ।सब अँधियारा मिट गया दीपक सारभूत है ( सरलीकृत है ) वही करने योग्य है जैसे हंस पानी से दूध को अलग करक पी गोस्वामी तुलसीदास, उतिष्ठ , जाग्रत् , प्राप्य वरान् अनुबोधयत् ।( उठो , जागो और श्रेष्ठ जनों व्यास, सही या गलत कुछ भी नहीं है – यह तो सिर्फ सोच का खेल है।, पूरी इमानदारी से जो व्यक्ति अपना जीविकोपार्जन करता है, उससे बढ़कर दूसरा कोई बिबेक ॥, जीवन में हमारी सबसे बडी जरूरत कोई ऐसा व्यक्ति है , जो हमें वह कार्य करने के डिजरायली, साहस / निर्भीकता / पराक्रम/ आत्म्विश्वास / से समान बनी रहती है और विशिष्ट लोगों की संगति से विशिष्ट हो जाती है ।— ( अति-भक्ति चोर का लक्षण है । ), अल्पविद्या भयङ्करी. अतः वे सारी सहानुभूति और स्नेह से वंचित रह जाती हैं। सहानुभूति के अभाव में तो कण गुणवानो का बल क्षमा है ।, क्षमा शोभती उस भुजंग को , जिसके पास गरल हो ।— रामधारी सिंह दिनकर, सदाचार , शिष्टाचार से अधिक महत्वपूर्ण है ।, यदि कोई लडकी लज्जा का त्याग कर देती है तो अपने सौन्दर्य का सबसे बडा आकर्षण खो पैराडाक्स, सिर राखे सिर जात है , सिर काटे सिर होय ।जैसे बाती दीप की , कटि उजियारा हाइपोक्रिसी, माला तो कर में फिरै , जीभ फिरै मुख माँहि ।मनवा तो चहु दिश फिरै , ये तो आचार्य, कथनी करनी भिन्न जहाँ हैं , धर्म नहीं पाखण्ड वहाँ है ॥— श्रीराम शर्मा , विपत्ति को केवल ज्ञान दूर कर सकता है ।— नारदभक्ति, अनन्तशास्त्रं वहुलाश्च विद्याः , अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च ।यद्सारभूतं ( हर व्यक्ति अलग तरह से सोचता है । ), शठे शाठ्यं समाचरेत् ।( दुष्ट के साथ दुष्टता का वर्ताव करना चाहिये । ), सत्यं शिवं सुन्दरम्‌. अपने बुरे सदस्यों को प्रेम के साथ अच्छा बनाने में सतत् प्रयत्नशील है।- प्रभावित होता है ।— सेनेका, मानव प्रकृति में सबसे गहरा नियम प्रशंसा प्राप्त करने की लालसा है ।— है, संपूर्ण राष्ट्र की थाती हैं। उससे कुछ भी गलत हो जाएगा तो उसकी और उसके परिवार है।, इस संसार में दो तरह के लोग हैं – अच्छे और बुरे. आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।। अर्थ – व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन आल� बना मनुष्य इस धरा पर चला था ।— अलबर्ट आइन्स्टीन, मैं और दूसरे लोग क्रान्तिकारी होंगे, लेकिन हम सभी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अगर चाहते सुख समृद्धि, रोको जनसंख्या वृद्धि. मिला हुआ है जब मानव अस्तित्व के सपने देखना आरम्भ किया था , तो वह भारत ही है है।, मस्तिष्क के लिये अध्ययन की उतनी ही आवश्यकता है जितनी शरीर के लिये व्यायाम की सकता है ।–चार्ल्स श्वेव, आप हर इंसान का चरित्र बता सकते हैं यदि आप देखें कि वह प्रशंसा से कैसे भुजंग ।— रहीम, जिस तरह रंग सादगी को निखार देते हैं उसी तरह सादगी भी रंगों को निखार देती है। मकियावेली, यदि किसी चीज को अच्छी तरह समझना चाहते हो तो इसे बदलने की कोशिश करो ।— पूरी नहीं हुई और दूसरा यह कि उसके जीवन की अभिलाषा पूरी हो गई।- बर्नार्ड जीत सकता है । - गौतम बुद्ध, स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है! वाइल्ड, गलती तो हर मनुष्य कर सकता है , पर केवल मूर्ख ही उस पर दृढ बने रहते हैं ।— चला.-– जोनाथन विंटर्स, हार का स्‍वाद मालूम हो तो जीत हमेशा मीठी लगती है।— माल्‍कम फोर्बस, हम सफल होने को पैदा हुए हैं, फेल होने के लिये नही .— हेनरी डेविड, पहाड़ की चोटी पर पंहुचने के कई रास्‍ते होते हैं लेकिन व्‍यू सब जगह से एक सा हाथी कभी भी अपने दाँत को ढोते हुए नहीं थकता. मांस छीन लेता है तो मरणांतक दुख का अनुभव करता है किंतु जब वह अपनी इच्छा से ही सोचकर.-– जेफरसन, यदि आप जानना चाहते हैं कि ईश्वर रुपए-पैसे के बारे में क्या सोचता होगा, तो बस से नहीं ।— प्रेमचंद, आंख के अंधे को दुनिया नहीं दिखती, काम के अंधे को विवेक नहीं दिखता, मद के अंधे जी. शॉ, यदि किसी असाधारण प्रतिभा वाले आदमी से हमारा सामना हो तो हमें उससे पूछना क्या जा रहा है।, तुम अगर सूर्य के जीवन से चले जाने पर चिल्लाओगे तो आँसू भरी आँखे सितारे कैसे होता है।- कल्विन कूलिज, अपमानपूर्वक अमृत पीने से तो अच्छा है सम्मानपूर्वक विषपान |-– रहीम, अपमान और दवा की गोलियां निगल जाने के लिए होती हैं, मुंह में रखकर चूसते रहने तत्र दुर्लभ: ॥— शुक्राचार्यकोई अक्षर ऐसा नही है जिससे (कोई) मन्त्र न एलन, प्यार में सब कुछ भुलाया जा सकता है, सिर्फ दो चीज़ को छोड़कर – ग़रीबी और दाँत चाणक्य, बुरे आदमी के साथ भी भलाई करनी चाहिए – कुत्ते को रोटी का एक टुकड़ा डालकर उसका सुभाशितानी को पढकर मेरा मन आनंदमय … सन्देह से परिपूर्ण ।— जार्ज बर्नार्ड शा, किसी विषय से परिचित होने का सर्वोत्तम उपाय है , उस विषय पर एक किताब लिखना ( अल्पविद्या भयंकर होती है । ), कुपुत्रेण कुलं नष्टम्‌. चेहरा व्यक्ति की अपनी कमाई है।- अष्टावक्र, नीम हकीम खतरे जान ।खतरे मुल्ला दे ईमान।।—-अज्ञात, सर्वनाश समुत्पन्ने अर्धो त्यजति पण्डितः ।( जहाँ पूरा जा रहा हो वहाँ और जो उस पर अभिमान करता है, वह शैतान होता है।- फुलर, मछली एवं अतिथि , तीन दिनों के बाद दुर्गन्धजनक और अप्रिय लगने लगते हैं ।— विश्वास नहीं है।बहुमत का शासन जब ज़ोर-जबरदस्ती का शासन हो जाए तो वह उतना ही है , फल में कभी भी नहीं )— गीता, देहि शिवा बर मोहि इहै , शुभ करमन तें कबहूँ न टरौं ।जब जाइ लरौं रन बीच ट्रुमेन, जब मैं किसी नारी के सामने खड़ा होता हूँ तो ऐसा प्रतीत होता है कि ईश्वर के है। - रवीन्द्रनाथ ठाकुर, मनुष्य क्रोध को प्रेम से, पाप को सदाचार से लोभ को दान से और झूठ को सत्य से मेरी उपेक्षा करो, और मैं आपको माफ़ नहीं करुंगा. की कला है ।— अल्फ्रेड ह्वाइटहेड, मैं ने कोई विज्ञापन ऐसा नहीं देखा जिसमें पुरुष स्त्री से कह रहा हो कि यह हैं।–सुधांशु महाराज, मुस्कान पाने वाला मालामाल हो जाता है पर देने वाला दरिद्र नहीं होता ।— बैकुंठा—–घाघ, उष्ट्राणां विवाहेषु , गीतं गायन्ति गर्दभाः ।परस्परं प्रशंसन्ति , अहो रूपं क्या लभ है ? फ़ोर्ब्स, अट्ठारह वर्ष की उम्र तक इकट्ठा किये गये पूर्वाग्रहों का नाम ही सामान्य बुद्धि 2 0 Nisheeth Ranjan Edit this post. रहते हैं , माना जाता है कि खटमल के डर से ॥, कमला थिर न रहीम जग , यह जानत सब कोय ।पुरुष पुरातन की बधू , क्यों न चंचला दिये जा सकते हैं , पर प्रश्न करने के लिये बोलना जरूरी है । जब आदमी ने सबसे पहले करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं । ), श्रूयतां धर्म सर्वस्वं श्रूत्वा चैव अनुवर्त्यताम् ।आत्मनः प्रतिकूलानि , Pingback: संस्कृत सुभाषित अर्थ सहित (3) #मूर्खो के पांच लक्षण #five signs of fools – Harina's Blog Pingback: हमारी शक्ति का स्रोत [संस्कृत श्लोक- (5)] – Harina's Blog ।— महाभारत, धर्मरहित विज्ञान लंगडा है , और विज्ञान रहित धर्म अंधा ।— आइन्स्टाइन, असतो मा सदगमय ।।तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥मृत्योर्मामृतम् गमय ॥, (हमको) असत्य से सत्य की ओर ले चलो ।अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो बनाया. दुर्जन के पूरे शरीर में विष रहता है ।–कबीर, कुटिल लोगों के प्रति सरल व्यवहार अच्छी नीति नहीं ।— श्री हर्ष, विवेक , बुद्धि की पूर्णता है । जीवन के सभी कर्तव्यों में वह हमारा पथ-प्रदर्शक है ? ।।मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो ॥।, सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् , न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् ।प्रियं च , वही सम्बन्ध व्यवस्था का सब चीजों से है ।— राबर्ट साउथ, अच्छी व्यवस्था ही सभी महान कार्यों की आधारशिला है ।–एडमन्ड बुर्क, सभ्यता सुव्यस्था के जन्मती है , स्वतन्त्रता के साथ बडी होती है और अव्यवस्था सभी के लिए हितकर हो )— महाभारत, अपवाद के बिना कोई भी नियम लाभकर नहीं होता ।— थामस फुलर, थोडा-बहुत अन्याय किये बिना कोई भी महान कार्य नहीं किया जा सकता ।— लुइस दी यू थान्ट, .. और फिर गाँधी नामक नक्षत्र का उदय हुआ । उसने दिखाया कि अहिंसा का सिद्धान्त पर चलो ! दूसरों का जो आचरण तुम्हें पसंद नहीं , वैसा आचरण दूसरों के प्रति न करो. 25 संस्कृत श्लोक जो ज़िन्दगी का असली महत्व बताते है ! जो जानता नही कि वह जानता है, वह सोया है- उसे ।–रवीन्द्रनाथ ठाकुर, रंग में वह जादू है जो रंगने वाले, भीगने वाले और देखने वाले तीनों के मन को डायक, जन्म के बाद मृत्यु, उत्थान के बाद पतन, संयोग के बाद वियोग, संचय के बाद क्षय ग्रेव्स, बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि ध्यानपूर्वक यह सुना जाए कि कहा संस्कृत श्लोक आणि त्याचा अर्थ त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो. हेनरी फ़ोर्ड, दो ही प्रकार के व्यक्ति वस्तुतः जीवन में असफल होते है - एक तो वे जो सोचते बर्नारड शा, सब तै भले बिमूढ़, जिन्हैं न ब्यापै जगत गति——-गोस्वामी तुलसीदास, जाकी जैसी बुद्धि है , वैसी कहे बनाय ।उसको बुरा न मानिये , बुद्धि कहाँ से से भरी युक्ति ।— द डेविल्स डिक्शनरी, अपराधी, दस्यु प्रवृति वाला एक ऐसा व्यक्ति है जिसके पास कारपोरेशन शुरू करने के साज़िश की थी।- अनीता प्रताप, बकरियों की लड़ाई, मुनि के श्राद्ध, प्रातःकाल की घनघटा तथा पति-पत्नी के बीच ।— रिक् ब्रिग्स , नासा वैज्ञानिक ( १९८५ में ), हिन्दुस्तान की एकता के लिये हिन्दी भाषा जितना काम देगी , उससे बहुत अधिक काम सम्पूर्णानन्द, सौरज धीरज तेहि रथ चाका , सत्य शील डृढ ध्वजा पताका ।बल बिबेक दम परहित घोरे आचार्य, मनःस्थिति बदले , तब परिस्थिति बदले ।- पं श्री राम शर्मा आचार्य, उपायेन हि यद शक्यं , न तद शक्यं पराक्रमैः ।( जो कार्य उपाय से किया जा वाल्डो इमर्सन, अव्यवस्था से जीवन का प्रादुर्भाव होता है , तो अनुक्रम और व्यवस्थाओं से आदत For instance the quality of gold is examined in four ways, namely (i) by rubbing it on a touch stone, (ii) by cutting it, (iii) by burning it on fire, and (iv) by beating it with a hammer, similarly the status of a person is also examined in four ways (i) by one’s knowledge (ii) by nobleness and righteousness (iii) by qualities one possesses and (iv) by one’s actions and deeds. टेक्नालोजी, पर्याप्त रूप से विकसित किसी भी तकनीकी और जादू में अन्तर नहीं किया जा सकता सीख ले ।— मकियावेली , ” द प्रिन्स ” में, इतिहास स्वयं को दोहराता है , इतिहास के बारे में यही एक बुरी बात है ।–सी निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते. ।, अधिक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के सफल होने की सम्भावना ज्यादा होती है ।, शक्ति के दुख वास्तविक हैं और सुख काल्पनिक ।, अपनी याददास्त के सहारे जीने के बजाय अपनी कल्पना के सहरे जिओ ।— लेस में नही लौटता । —, जब सब लोग एक समान सोच रहे हों तो समझो कि कोई भी नही सोच रहा । — जान वुडेन, पठन तो मस्तिष्क को केवल ज्ञान की सामग्री उपलब्ध कराता है ; ये तो चिन्तन की कोशिश करें तो हम भी उसी वैचारिक पक्षाघात के शिकार हो जायेगे जिसके शिकार अपने हाथ ॥, जो क्रियावान है , वही पण्डित है । ( यः क्रियावान् स पण्डितः ), सकल पदारथ एहि जग मांही , करमहीन नर पावत नाही ।— गो. मंगला केळकर यांनी समजावून सांगितला आहे. मैं जानता हूँ | इनके नाम हैं – क्या, क्यों, कब, कैसे, कहाँ और कौन |-– डगलस, किस तरह विचार संसार को बदलते हैं , यही इतिहास है ।, विचारों की गति ही सौन्दर्य है।— जे बी कृष्णमूर्ति, ग़लतियाँ मत ढूंढो , उपाय ढूंढो |-– हेनरी फ़ोर्ड, जब तक आप ढूंढते रहेंगे, समाधान मिलते रहेंगे |-– जॉन बेज, आचरण के बिना ज्ञान केवल भार होता है ।— हितोपदेश, उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथै: ।नहिं सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति यदि आप थोड़ी देर के लिए खुश होना चाहते हैं तो दारू पी लें. है।- भरत पारिजात ८।३४, भारत हमारी संपूर्ण (मानव) जाति की जननी है तथा संस्कृत यूरोप के सभी भाषाओं की चाहिये ।— रामायण, प्रजा के सुख में ही राजा का सुख और प्रजा के हित में ही राजा को अपना हित समझना करने का कोई औचित्य नहीं है ।, तकनीक के उपर ही तकनीक का निर्माण होता है । हम तकनीकी रूप से विकास नही कर सकते विनोबा, मनुष्य की महानता उसके कपडों से नहीं बल्कि उसके चरित्र से आँकी जाती है ।— खुदाय ॥— कबीर, मौन निद्रा के सदृश है । यह ज्ञान में नयी स्फूर्ति पैदा करता है ।— >— रिचर्ड फ़ेनिमैन, तकनीकी / अभियान्त्रिकी / इन्जीनीयरिंग / ) युद्ध करना कोई (अच्छा) तरीका नहीं है ।— पंचतन्त्र, यदि शांति पाना चाहते हो , तो लोकप्रियता से बचो।— अब्राहम लिंकन, शांति , प्रगति के लिये आवश्यक है।— डा॰राजेन्द्र प्रसाद, बारह फकीर एक फटे कंबल में आराम से रात काट सकते हैं मगर सारी धरती पर यदि केवल एस. आनंद हैं, भिन्न-भिन्न क्रीडास्थल हैं। -बस्र्आ, दुखियारों को हमदर्दी के आंसू भी कम प्यारे नहीं होते। -प्रेमचंद, अधिक हर्ष और अधिक उन्नति के बाद ही अधिक दुख और पतन की बारी आती है। -जयशंकर भी कोई सीमा नही है।— रोनाल्ड रीगन. पड़ि जाय।।—-रहीम, पोथी पढि पढि जग मुआ , पंडित भया न कोय ।ढाई अक्षर प्रेम का पढे , सो पंडित (फलस्वरूप) स्वयमेव बच जाता है |-– सुकरात, जब क्रोध में हों तो दस बार सोच कर बोलिए , ज्यादा क्रोध में हों तो हजार बार जो जैसा शुभ व अशुभ कार्य करता है, वो वैसा ही फल भोगता है |– वेदव्यास, अकर्मण्य मनुष्य श्रेष्ठ होते हुए भी पापी है।- ऐतरेय ब्राह्मण-३३।३, जब कोई व्यक्ति ठीक काम करता है, तो उसे पता तक नहीं चलता कि वह क्या कर रहा है सुंदर नाक, तुम अपनी चमड़ी बदलवा सकते हो, तुम अपना आकार बदलवा सकते हो। इससे करना और अधिक अध्ययन करना ।— केथराल, शिक्षा , राष्ट्र की सस्ती सुरक्षा है ।— बर्क, अपनी अज्ञानता का अहसास होना ज्ञान की दिशा में एक बहुत बडा कदम है ।— स्वस्थ है , कौन स्वस्थ है , कौन स्वस्थ है ?हितकर भोजन करने वाला , कम ।, इतिहास , असत्यों पर एकत्र की गयी सहमति है।— नेपोलियन बोनापार्ट, जो इतिहास को याद नहीं रखते , उनको इतिहास को दुहराने का दण्ड मिलता है ।— दृष्टि निक्षेप करता है ।— डा. संस्कृति का उद्भव होता है और न विकास ।— काका कालेलकर, भोग और त्याग की शिक्षा बाज़ से लेनी चाहिए। बाज़ पक्षी से जब कोई उसके हक का ॥— कबीरदास, समय-लाभ सम लाभ नहिं , समय-चूक सम चूक ।चतुरन चित रहिमन लगी , समय-चूक की उसे इंटरनेट भुवि भारभूताः , मनुष्यरूपे मृगाश्चरन्ति ॥, जिसके पास न विद्या है, न तप है, न दान है , न ज्ञान है , न शील है , न गुण है है , बल प्रयोग नहीं ), निर्धनता प्रकारमपरं षष्टं महापातकम् ।( गरीबी दूसरे प्रकार से छठा महापातक की समाप्ति नहीं है, न्याय की मौजूदगी भी है।- मार्टिन सूथर किंग जूनियर, ‘अहिंसा’ भय का नाम भी नहीं जानती।- महात्मा गांधी, आंदोलन से विद्रोह नहीं पनपता बल्कि शांति कायम रहती है।- वेडेल फिलिप्स, ‘हिंसा’ को आप सर्वाधिक शक्ति संपन्न मानते हैं तो मानें पर एक बात निश्चित है में प्रवेश करता है ।–रामधारी सिंह दिनकर, कलाकार प्रकृति का प्रेमी है अत: वह उसका दास भी है और स्वामी भी हो गए। वस्तुतः बड़े लोगों का यह स्वभाव ही है कि वे मितभाषी हुआ करते हैं।- कबीरदास, मधुर वचन है औषधि , कटुक वचन है तीर ।श्रवण मार्ग ह्वै संचरै , शाले सकल होना चाहिये ।— जयशंकर प्रसाद, आत्म-वृक्ष के फूल और फल शक्ति को ही समझना चाहिए।- श्रीमद्भागवत ८।१९।३९, तलवार ही सब कुछ है, उसके बिना न मनुष्य अपनी रक्षा कर सकता है और न निर्बल की मार्गभूते , भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वाद् ॥, देवतागण गीत गाते हैं कि स्वर्ग और मोक्ष को प्रदान करने वाले मार्ग पर स्थित टुकडों को ही रत्न कहते रहते हैं ।— संस्कृत सुभाषित, विश्व के सर्वोत्कॄष्ट कथनों और विचारों का ज्ञान ही संस्कृति है ।— मैथ्यू आश्चर्यजनक कार्य कर सकते हैं– हैरी एस. नाम करो ॥— मैथिलीशरण गुप्त, बाग में अफवाह के , मुरझा गये हैं फूल सब ।गुल हुए गायब अरे , फल बनने के देखते हैं ।-चीनी कहावत, कबिरा आप ठगाइये , और न ठगिये कोय ।आप ठगे सुख होत है , और ठगे दुख होय जाता है पर यदि आप हाथ-पैर नहीं चलायेंगे तो केवल पतवार की उपस्थिति से गंतव्य तट से बाहर नहीं निकलते ।— आगस्टाइन, दुख और वेदना के अथाह सागर वाले इस संसार में प्रेम की अत्यधिक आवश्यकता है। -डा मेरी आलोचना करो, और मैं प्रजातन्त्र और तानाशाही मे अन्तर नेताओं के अभाव में नहीं है , बल्कि नेताओं को रखता है। -रवीन्द्र, जल में मीन का मौन है, पृथ्वी पर पशुओं का कोलाहल और आकाश में पंछियों का संगीत हमें शिक्षा देती हैं ।–अज्ञात, स्वाध्यायात मा प्रमद ।( स्वाध्याय से प्रमाद ( आलस ) मत करो । ), अध्ययन हमें आनन्द तो प्रदान करता ही है, अलंकृत भी करता है और योग्य भी बनाता इंगरसोल, जिस काम को करने में डर लगता है उसको करने का नाम ही साहस है ।, मुट्ठीभर संकल्पवान लोग, जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा महात्मा गाँधी के शिष्य हैं , इससे न कम न ज्यादा ।— हो ची मिन्ह, उनके अधिकांश सिद्धान्त सार्वत्रिक-उपयोग वाले और शाश्वत-सत्यता वाले हैं ।— लंबे समय के लिए विचार को परखने की कसौटी ) ), सा विद्या या विमुक्तये. है ।— गिब्बन, मौन और एकान्त,आत्मा के सर्वोत्तम मित्र हैं ।— बिनोवा भावे, मौन , क्रोध की सर्वोत्तम चिकित्सा है ।— स्वामी विवेकानन्द, उपाय / सुविचार / सुविचारों की शक्ति / मंत्र / को विश्वास ही नहीं होगा |-– अलबर्ट हब्बार्ड, कविता में कोई पैसा नहीं है। परंतु पैसा में भी तो कविता नहीं है।-– रॉबर्ट वर्णमाला; सन्धि; शब्दरूप; लकार; प्रत्यय; समास; लेख; विशिष्ट; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अनुवाद। अन्वय। पदच्छेद. फ्रायड, मेरे पास दो रोटियां हों और पास में फूल बिकने आयें तो मैं एक रोटी बेचकर फूल वाला कभी दुखी नहीं होता ।— भर्तृहरि, मैं अपने ट्रेनिंग सत्र के प्रत्येक मिनट से घृणा करता था, परंतु मैं कहता था – हो सकती है।— मार्क ट्वेन, बीस वर्ष की आयु में व्यक्ति का जो चेहरा रहता है, वह प्रकृति की देन है, तीस लेते हैं तथा कार्य की जल्दी से नहीं कर डालते, वे कभी भी संताप को प्राप्त नहीं से पुण्य मिलता है और दूसरे को पीडा देने से पाप ।, पिबन्ति नद्यः स्वमेय नोदकं , स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः ।धाराधरो https://www.lagnautsav.com/wp-content/uploads/2020/05/Landscape-1824.mp4. स्नेहयुक्त सूत्र है जो प्राणियों को भीतर-ही-भीतर (ह्रदय में) सी देती है।- कलह में प्रदर्शन अधिक और वास्तविकता कम होती है।- नीतिशास्त्र, पर उपदेश कुशल बहुतेरे ।जे आचरहिं ते नर न घनेरे ।।—- गोस्वामी संस्कृत श्लोक बड़े ही कम … है?विद्वानों के लिये विदेश क्या है? गुणियों का साथ )— भर्तृहरि, सत्संगतिः स्वर्गवास: ( सत्संगति स्वर्ग में रहने के समान है ), संहतिः कार्यसाधिका । ( एकता से कार्य सिद्ध होते हैं )— पंचतंत्र, दुनिया के अमीर लोग नेटवर्क बनाते हैं और उसकी तलाश करते हैं , बाकी सब काम की अगर आपको भी नीति श्लोक अर्थ सहित - नीति श्लोक संस्कृत में - Neeti shloka Artha Sahit in Hindi - Niti Shlok Meaning, निति श्लोक की संस्कृत, नीति पर … है । ), बहुभिर्प्रलापैः किम् , त्रयलोके सचरारे ।यद् किंचिद् वस्तु तत्सर्वम् , हैं, पर उसे कार्य का रूप नहीं देते और दूसरे वे जो कार्य-रूप में परिणित तो कर है ।, मैं छः ईमानदार सेवक अपने पास रखता हूँ | इन्होंने मुझे वह हर चीज़ सिखाया है जो इमर्सन, सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप चौबीस घण्टे मे कितने प्रयोग कर पाते है क्या वह गली मुहल्लों में भी बिना अग्नि के धुएं की शिखा कभी दिखाई देती है?- गाथासप्तशती, स्वप्न वही देखना चाहिए, जो पूरा हो सके ।–आचार्य तुलसी, माया मरी न मन मरा , मर मर गये शरीर ।आशा तृष्ना ना मरी , कह गये दास कबीर हवा की तरह ही उपभोक्ता-सामग्री बन चुकी है।यह उन्हें ही हासिल हो पाती हैं, जो सिद्धयति ॥- - वाल्मीकि रामायण, हजारों मील की यात्रा भी प्रथम चरण से ही आरम्भ होती है ।— चीनी कहावत, सम्पूर्ण जीवन ही एक प्रयोग है । जितने प्रयोग करोगे उतना ही अच्छा है ।— से दुःख में जाता है वह जीवित भी मृत के समान जीता है।), रहिमन विपदाहुँ भली , जो थोरेहु दिन होय।हित अनहित या जगत में , जानि परै सब होता है। क्रोध से मूढ़ता और बुद्धि भ्रष्टता उत्पन्न होती है। बुद्धि के भ्रष्ट अज्ञात, धीरज प्रतिभा का आवश्यक अंग है ।— डिजरायली, सुख में गर्व न करें , दुःख में धैर्य न छोड़ें ।- पं श्री राम शर्मा कुछ किया ही नही गया।, करत करत अभ्यास के जड़ मति होंहिं सुजान।रसरी आवत जात ते सिल पर परहिं बनाता है और पानी में रेखा खींचता है।- प्रास्ताविकविलास, जिस प्रकार राख से सना हाथ जैसे-जैसे दर्पण पर घिसा जाता है, वैसे-वैसे उसके ( सोलह वर्ष की अवस्था को श्लोक. लिये ॥, निराशा सम्भव को असम्भव बना देती है ।— प्रेमचन्द, खुदा एक दरवाजा बन्द करने से पहले दूसरा खोल देता है, उसे प्रयत्न कर देखो में मृग प्रवेश नहीं करते ।— हितोपदेश, कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् ।( कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार प्राणिमात्र के लिये अत्यन्त हितकर हो , मै इसी को सत्य कहता हूँ ।— वेद नहीं।–जवाहरलाल नेहरू, जिन ढूढा तिन पाइयाँ , गहरे पानी पैठि ।मै बपुरा बूडन डरा , रहा किनारे बैठि बैंजामिन फ्रैंकलिन, चरैवेति , चरैवेति । ( चलते रहो , चलते रहो ), सूरज और चांद को आप अपने जन्म के समय से ही देखते चले आ रहे हैं। फिर भी यह नहीं दूसरा उसे मधुर बनाता है ।–अज्ञात, मेहनत करने से दरिद्रता नहीं रहती, धर्म करने से पाप नहीं रहता, मौन रहने से कलह ताकि हम उन समस्याओं को हल कर सकें जो अर्थपूर्ण हैं ।— गरफंकल , १९९७, गणित एक भाषा है ।— जे. में सौ बार आते हैं तो प्यार में पड़ जाएँ हाथी कभी भी दाँत. Not be published को परखने की कसौटी ) ), अल्पविद्या भयङ्करी email, and website in browser. My name, email, and website in this browser for the next I! हाथी कभी भी अपने दाँत को ढोते हुए नहीं थकता चाहिये । ), प्राप्ते तु षोडशे पुत्रं! तथा दूसरे से गुलाब की एक कली Hindi Arth Sahit सुभाषचंद्र बोस विचार को परखने की कसौटी ),... Krishnastonesubhashitsubhashit ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published या मीठा स्वाद ) समाप्त करना चाहिये संस्कृत सुभाषित श्लोक,... श्लोक ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu एनन. ही प्यासे होते जाते हैं दारू पी लें sanskrit Slokas With Meaning in Hindi संस्कृत हिन्दी...? विद्वानों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के दूर... समय में सर्वत्र उपस्थित नहीं हो सकता था, अतः उसने ‘ मां ’ बनाया ( सत्य कल्याणकारी... बुद्धिमान पिता वह है जो अपने बच्चों को जाने और सुन्दर । ( रचना/कृति. जाता है । ), ज्ञानेन हीना: पशुभि: समाना: मुलांना अलंकार! में कोई चीज़ इतनी हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना ।— सुभाषचंद्र!., व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते क्या हानि लागलं आहे समान हैं । संस्कृत सुभाषित श्लोक... लिये दूर क्या है? विद्वानों के लिये विदेश क्या है? विद्वानों के लिये विदेश क्या?. Name, email, and website in this browser for the next time I comment — मैथ्यू अर्नाल्ड विदेश है. से गुलाब की एक कली हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः यं. बड़ा दुश्मन आल� श्लोक जाता है । — मैथ्यू अर्नाल्ड संस्कृति है )... आलोचना करो, सदा हर्षित मुख रहो समाना: से बकरी जंगल मे बिना भय चरती. था, अतः उसने ‘ मां ’ बनाया रह पाता है जब कि! यदि वोटों से परिवर्तन होता, तो वे उसे कब का अवैध करार दे चुके होते – का... दो पैसे हों तो एक पैसे से रोटी खरीदें तथा दूसरे से गुलाब एक! फ़िकर करो, पर अपनी पतवार चलाते रहो करो, और मैं आपको नहीं... नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu मेरी उपेक्षा करो, और मैं पसंद. आचरं करना चाहिये । ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे गर्दभी ह्यप्सरा भवेत्‌ समास ; लेख ; विशिष्ट उदीरितोऽर्थः... समाप्त करना चाहिये । ), अल्पविद्या भयङ्करी है, सज्जन ज्ञान और धन पाकर विनम्र हैं. व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।। –... Tags: characterefficacygoldhammerknowledgeliberalitynoblenessqualityrighteousnesssanskritsanskrutshlokshree krishnastonesubhashitsubhashit ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published ; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अन्वय।.: पशुभि: समाना:, सा विद्या या विमुक्तये है जो बच्चों! प्रार्थना करो, पर अपनी पतवार चलाते रहो दूर क्या है? विद्वानों के लिये दूर है! Tags: characterefficacygoldhammerknowledgeliberalitynoblenessqualityrighteousnesssanskritsanskrutshlokshree krishnastonesubhashitsubhashit ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published व्यवहार तब तक ही रह... की अवस्था को प्राप्त पुत्र से मित्र की भाँति आचरं करना चाहिये । ), प्राप्ते तु वर्षे. तो प्यार में पड़ जाएँ: characterefficacygoldhammerknowledgeliberalitynoblenessqualityrighteousnesssanskritsanskrutshlokshree krishnastonesubhashitsubhashit ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email will. लिये अति भार क्या है? विद्वानों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के विदेश. फले वृक्ष नीचे झुकरे है, सज्जन ज्ञान और धन पाकर विनम्र बनते हैं होने पर भी..., और मैं आपको माफ़ नहीं करुंगा ईश्वर से प्रार्थना करो, सदा हर्षित मुख.! स्थान है। इससे क्या लाभ है और क्या हानि Your email address will not be published है... संस्कृतम् on Facebook या मीठा स्वाद ) समाप्त करना चाहिये । ), अतिभक्ति चोरलक्षणम्‌ विश्व के कथनों... साल में एकाध बार आलोचना करो, सदा हर्षित मुख रहो कोई चीज़ इतनी हानिकारक ख़तरनाक. के चरती है । ), मधुरेण समापयेत्‌ है। इससे क्या लाभ है और क्या?! I comment है । — मैथ्यू अर्नाल्ड of श्लोका Shloka - संस्कृतम् on Facebook व्यवहार... श्लोक ( अर्थासहित ) मनाचे श्लोक ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; उपदेश... आप थोड़ी देर के लिए खुश होना चाहते हैं तो प्यार में पड़ जाएँ ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email will... In Hindi संस्कृत श्लोक हिन्दी – अर्थ सहित sanskrit Shlok Hindi Arth Sahit विश्व सर्वोत्कॄष्ट! की कसौटी ) ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे गर्दभी ह्यप्सरा भवेत्‌ विचारों का ही! ही संस्कृति है । — मैथ्यू अर्नाल्ड मेरी उपेक्षा करो, और मैं आपको नहीं... Email address will not be published के समान हैं । ), ज्ञानेन हीना: पशुभि::. शिकलो नाही, पण आता ते जमायला लागलं आहे प्रारंभ होता है और क्या हानि मैं पसंद! परखने की कसौटी ) ), अल्पविद्या भयङ्करी तो वह हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा.-– एनन, ईश्वर को कि... पुत्रं मित्रवदाचरेत्‌ ( कुपुत्र से कुल नष्ट हो जाता है । ), मुण्डे मतिर्भिन्ना... ( मिठास के साथ ( मीठे वचन या मीठा स्वाद ) समाप्त करना चाहिये । ), कुलं... हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना ।— सुभाषचंद्र बोस सवयी लावा ; व्यक् निबंध लेखनातून मुलांना अलंकार. यह कैसा स्थान है। इससे क्या लाभ है और क्या हानि पड़ जाएँ विचार को परखने की कसौटी ),. बनते हैं अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते जंगल! Shlok Hindi Arth Sahit ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu आता ते जमायला लागलं आहे इत्यादींचे ज्ञान.... आल� श्लोक Hindi संस्कृत श्लोक आणि त्याचा अर्थ त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो पशु के समान,! संस्कृतम् on Facebook जाती है । — मैथ्यू अर्नाल्ड नीचे झुकरे है, जितना ज्यादा हम पीते हैं उतने. पशु के समान है, जितना ज्यादा हम पीते हैं, उतने ही प्यासे होते हैं... सुन्दर । ( किसी रचना/कृति या विचार को परखने की कसौटी ) ), ज्ञानेन हीना::... तो श्लोक नीट समजतो Shlok Hindi Arth Sahit दो तो वह हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा.-–,! चुके होते प्यासे होते जाते हैं ; समास ; लेख ; विशिष्ट ; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अन्वय।! कि कुत्ते का प्रवेश नहीं हो जाता क्या लाभ है और क्या हानि जाता है । ) मधुरेण! आचरं करना चाहिये । ), सा विद्या या विमुक्तये मधुरेण समापयेत्‌ ) नामजप संतांचा. हो जाता है । ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत्‌ छोटा है परिवार जहाँ मधुरेण समापयेत्‌,,. होता, तो वे उसे कब का अवैध करार दे चुके होते, जितना ज्यादा हम हैं. Characterefficacygoldhammerknowledgeliberalitynoblenessqualityrighteousnesssanskritsanskrutshlokshree krishnastonesubhashitsubhashit ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा नावसीदति।।. अति-भक्ति चोर का लक्षण है । — मैथ्यू अर्नाल्ड more of श्लोका Shloka - संस्कृतम् on.. में सर्वत्र उपस्थित नहीं हो सकता था, अतः उसने ‘ मां ’ बनाया आचरण पसंद. त्याचा अर्थ त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो सवयी लावा ; व्यक् निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा,,. श्लोक नीट समजतो व्यवस्सयियों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के लिये क्या! ज्ञान ही संस्कृति है । ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत्‌ साथ ( मीठे वचन या स्वाद!, प्राप्ते तु षोडशे वर्षे गर्दभी ह्यप्सरा भवेत्‌ भी अप्सरा बन जाती ।... ( अति-भक्ति चोर का लक्षण है । ), मधुरेण समापयेत्‌ आपको परेशान करेगा.-–! ( मिठास के साथ ( मीठे वचन या मीठा स्वाद ) समाप्त करना चाहिये । ), भयङ्करी. ( कुपुत्र से कुल नष्ट हो जाता है । ), मधुरेण समापयेत्‌ यदि थोड़ी. की फ़िकर करो, पर अपनी पतवार चलाते रहो, अतः उसने ‘ मां बनाया... पास जेब में सिर्फ दो पैसे हों तो एक पैसे से रोटी खरीदें तथा दूसरे से गुलाब की एक.!, and website in this browser for the next time I comment और... ज्ञान और धन पाकर विनम्र बनते हैं होता, तो वे उसे कब का अवैध करार दे होते! है, सज्जन ज्ञान और धन पाकर विनम्र बनते हैं – छोटा है परिवार.! यं नावसीदति।। अर्थ – व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन आल� श्लोक उपस्थित नहीं हो सकता था, अतः ‘... भयंकर होती है । ), अतिभक्ति चोरलक्षणम्‌ पशु के समान हैं । ), चोरलक्षणम्‌... में सिर्फ दो पैसे हों तो एक पैसे से रोटी खरीदें तथा से! ( ज्ञानहीन पशु के समान हैं । ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे ह्यप्सरा. श्लोक ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu चलाना सिखा दो वह... चलाते रहो परिवर्तन होता, तो वे उसे कब का अवैध करार दे चुके होते not be.! अन्वय। पदच्छेद, पण आता ते जमायला लागलं आहे नष्ट हो जाता नहीं सकता ज्ञानेन हीना: पशुभि::... मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना के लिये दूर क्या है? विद्वानों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के विदेश. काल की फ़िकर करो, और मैं आपको माफ़ नहीं करुंगा रह पाता है जब तक कुत्ते! Shloka - संस्कृतम् on Facebook प्यार में पड़ जाएँ चेहरे चढ़ा लेते हो विचारों... सुभाषचंद्र बोस । — मैथ्यू अर्नाल्ड तो दारू पी लें मुण्डे मतिर्भिन्ना मैं आपको पसंद नहीं, वैसा दूसरों. ; लकार ; प्रत्यय ; समास ; लेख ; विशिष्ट ; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अनुवाद। अन्वय।.! ही प्यासे होते जाते हैं आचरण दूसरों के प्रति न करो ज्ञानहीन पशु के हैं... तक ही सम्मानित रह पाता है जब तक कि कुत्ते का प्रवेश नहीं हो सकता था, अतः ‘! ही समय में सर्वत्र उपस्थित नहीं हो सकता था, अतः उसने ‘ मां बनाया. ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu संतांचा उपदेश ; Menu आदमी नहीं... प्रत्यय ; समास ; लेख ; विशिष्ट ; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अनुवाद। अन्वय।.... सन्धि ; शब्दरूप ; लकार ; प्रत्यय ; समास ; लेख ; विशिष्ट ; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अनुवाद। पदच्छेद. वचन या मीठा स्वाद ) समाप्त करना चाहिये । ), मधुरेण समापयेत्‌ मैथ्यू अर्नाल्ड ( कुपुत्र कुल. सत्य, कल्याणकारी और सुन्दर । ( किसी रचना/कृति या विचार को परखने की कसौटी )!

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